Marne ki Barsi Kab Ki Jati Hai

मरने के बाद बरसी कब की जाती है? और इसका क्या उद्देश्य है?

📅 त्वरित उत्तर · Quick Answer
बरसी कब होती है?
मृत्यु के ठीक एक वर्ष बाद उसी हिंदी पंचांग तिथि को बरसी (वार्षिक श्राद्ध) की जाती है। इसे संवत्सरी या वार्षिक श्राद्ध भी कहते हैं।
★ 4.9   (5,000+ परिवारों की सेवा)  ·  15+ वर्ष दिल्ली NCR  ·  24×7 आपातकालीन सहायता

बरसी कब की जाती है?

शास्त्रों के अनुसार, किसी प्रियजन की मृत्यु के ठीक एक वर्ष बाद (12वें महीने में) जिस तिथि (हिंदी पंचांग के अनुसार तिथि, न कि अंग्रेजी कैलेंडर की तारीख) पर उनका निधन हुआ था, उसी तिथि को बरसी का श्राद्ध किया जाता है।

इसे ‘वार्षिक श्राद्ध’ या ‘संवत्सरी’ भी कहा जाता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी का निधन आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को हुआ था, तो अगले वर्ष आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की नवमी को ही उनकी बरसी मनाई जाएगी।

विशेष नोट: कुछ क्षेत्रों या पारिवारिक परंपराओं के अनुसार, गरुड़ पुराण के नियमों का पालन करते हुए मृत्यु के 11वें या 12वें महीने के कुछ विशेष दिनों में भी इसे संपन्न किया जाता है, लेकिन मुख्य रूप से यह एक वर्ष पूरा होने पर ही होती है।

बरसी करने का मुख्य उद्देश्य क्या है?

हिंदू दर्शन में माना जाता है कि आत्मा अमर है और मृत्यु केवल शरीर का अंत है। बरसी के अनुष्ठान के पीछे गहरे आध्यात्मिक और सामाजिक कारण हैं:

1. पितृलोक की यात्रा को सुगम बनाना

धार्मिक मान्यताओं (विशेषकर गरुड़ पुराण) के अनुसार, मृत्यु के बाद जीवात्मा को यमलोक या पितृलोक तक की यात्रा तय करने में पूरा एक वर्ष का समय लगता है। इस एक वर्ष के दौरान आत्मा ‘प्रेत रूप’ में होती है। जब एक वर्ष बाद बरसी का श्राद्ध और पिंड दान किया जाता है, तो उस ऊर्जा से आत्मा को बल मिलता है, वह प्रेत योनि से मुक्त होकर ‘पितर’ (पूर्वज) के रूप में स्थापित होती है।

2. पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त करना

बरसी का एक मुख्य उद्देश्य पितरों को तृप्त करना है। जब विधि-विधान से ब्राह्मणों को भोजन कराया जाता है, दान-पुण्य किया जाता है और तर्पण होता है, तो तृप्त होकर पूर्वज अपने परिवार को सुख, समृद्धि, वंश वृद्धि और शांति का आशीर्वाद देते हैं।

3. सामाजिक और पारिवारिक जुड़ाव

बरसी केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह परिवार और समाज को एक सूत्र में बांधने का माध्यम भी है। इस दिन सभी सगे-संबंधी एकत्रित होते हैं, दिवंगत आत्मा को याद करते हैं और उनके अच्छे कार्यों की चर्चा करते हैं। यह परिवार के प्रति एकजुटता दिखाने का एक तरीका है।

4. शोक की समाप्ति और जीवन में आगे बढ़ना

मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो बरसी को ‘शोक काल’ (Mourning Period) की समाप्ति माना जाता है। एक साल तक परिवार दिवंगत व्यक्ति की याद में सादगी से रहता है। बरसी का अनुष्ठान करने के बाद परिवार को वापस सामान्य जीवन की ओर लौटने और शुभ कार्य शुरू करने की अनुमति मिलती है।

बरसी की मुख्य विधि

इस दिन मुख्य रूप से निम्नलिखित कार्य किए जाते हैं:

  • तर्पण और पिंडदान: योग्य पंडित जी के मार्गदर्शन में पवित्र मंत्रों के साथ पितरों को जल और पिंड अर्पित करना।
  • ब्राह्मण भोज: ब्राह्मणों को आदरपूर्वक भोजन कराना और उन्हें वस्त्र, अनाज या दक्षिणा दान करना।
  • दान-पुण्य: इस दिन गरीबों, असहायों और पशु-पक्षियों (विशेषकर कौए, गाय और कुत्ते) को भोजन कराना अत्यंत फलदायी माना जाता है।

बरसी की तैयारी कैसे करें? (5 आसान चरण)

बरसी एक निर्धारित तिथि का अनुष्ठान है — सही समय पर बुकिंग करने से सब कुछ शांतिपूर्वक संपन्न होता है।

  1. तिथि तय करें: पंचांग के अनुसार मृत्यु की तिथि देखें और अगले वर्ष की वही तिथि नोट करें।
  2. पंडित बुक करें: बरसी से कम से कम 3–5 दिन पहले पंडित जी की उपलब्धता सुनिश्चित करें।
  3. सामग्री जुटाएं: तर्पण और पिंड दान के लिए तिल, जौ, कुशा, पिंड सामग्री आदि की व्यवस्था करें।
  4. स्थान तय करें: घर पर या निकटतम शमशान घाट पर — दोनों विकल्पों में LRF सहायता करता है।
  5. ब्राह्मण भोज की व्यवस्था: यथासंभव ब्राह्मणों को भोजन कराने और दान-दक्षिणा की व्यवस्था पहले से करें।

बरसी पूजा पैकेज — घर या घाट पर बुक करें

Last Ride Funeral के अनुभवी पंडित जी दिल्ली NCR में घर और घाट दोनों जगह बरसी की पूर्ण विधि संपन्न कराते हैं। Last Ride Funeral के साथ पहले से बुकिंग करें और तनाव-मुक्त अनुष्ठान सुनिश्चित करें।

बेसिक
₹5,101
घर पर बरसी पूजा
  • ✓ योग्य पंडित जी
  • ✓ वैदिक मंत्रोच्चार
  • ✓ तर्पण विधि
  • ✓ पंचांग के अनुसार तिथि

📞 बुक करें

⭐ सर्वाधिक बुक
स्टैंडर्ड
₹8,501
पंडित + पूर्ण सामग्री किट
  • ✓ योग्य पंडित जी
  • ✓ तर्पण + पिंड दान
  • ✓ पूर्ण बरसी सामग्री किट
  • ✓ वैदिक मंत्रोच्चार
  • ✓ घर या घाट पर

📞 अभी बुक करें

प्रीमियम
₹11,001
घाट पर बरसी + पिंड दान + ब्राह्मण भोज
  • ✓ घाट पर पूर्ण विधि
  • ✓ तर्पण + पिंड दान
  • ✓ ब्राह्मण भोज (5 ब्राह्मण)
  • ✓ सामग्री किट सहित
  • ✓ Lodhi Road / Nigambodh

📞 बुक करें

कम्प्लीट
₹15,001
सम्पूर्ण बरसी पैकेज
  • ✓ पंडित + पूर्ण सामग्री
  • ✓ घाट पर तर्पण + पिंड दान
  • ✓ ब्राह्मण भोज (11 ब्राह्मण)
  • ✓ दान-दक्षिणा प्रबंध
  • ✓ फोटोग्राफी सहित
  • ✓ वरिष्ठ समन्वयक सहायता

📞 बुक करें

🪔 बरसी सामग्री किट — ₹4,501
सभी जरूरी सामग्री एक पैकेज में — डिलीवरी सहित
तिल · जौ · कुशा · चावल · काले तिल · पिंड सामग्री · धूप-दीप · दक्षिणा पैकेट · गमछा · धोती · तांबे का लोटा · गाय का घी

📞 किट मंगाएं

* किसी भी पैकेज के साथ किट निःशुल्क मिलती है

एक गरिमापूर्ण विदाई: Last Ride Funeral

जब हम अपने किसी प्रियजन को खो देते हैं, तो उस असीम दुख के बीच धार्मिक रीति-रिवाजों को सही तरीके से संभालना मानसिक रूप से कठिन हो जाता है। Last Ride Funeral आपकी इसी घड़ी में एक सच्चे साथी की तरह खड़ा रहता है।

अंतिम संस्कार से लेकर चौदहवीं, अस्थि विसर्जन और वार्षिक बरसी के सभी प्रबंधों तक, Last Ride Funeral हर परंपरा को पूरे सम्मान, शुद्धता और विधि-विधान के साथ संपन्न कराने में आपकी मदद करता है। ताकि आप बिना किसी तनाव के अपने प्रियजन की अंतिम यात्रा और उनके श्राद्ध कर्म को शांतिपूर्वक पूरा कर सकें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

बरसी के लिए कितना खर्च आता है?
Last Ride Funeral के साथ बरसी पूजा ₹5,101 से शुरू होती है, जिसमें योग्य पंडित जी, वैदिक मंत्रोच्चार और तर्पण विधि शामिल है। पूर्ण सामग्री किट के साथ स्टैंडर्ड पैकेज ₹8,501 में उपलब्ध है।
क्या पंडित जी घर आ सकते हैं?
हाँ, Last Ride Funeral के पंडित जी दिल्ली NCR में घर पर आकर बरसी की पूर्ण विधि संपन्न कराते हैं। घाट पर भी व्यवस्था की जाती है — जैसा परिवार उचित समझे।
बरसी और श्राद्ध में क्या फर्क है?
श्राद्ध एक व्यापक शब्द है जो पितरों के लिए किए जाने वाले सभी अनुष्ठानों को दर्शाता है। बरसी (वार्षिक श्राद्ध) विशेष रूप से मृत्यु की तिथि से एक वर्ष बाद किया जाने वाला श्राद्ध है। पितृ पक्ष में किया जाने वाला श्राद्ध अलग होता है।
बरसी की तिथि कैसे निकालें?
मृत्यु की अंग्रेजी तारीख के बजाय हिंदी पंचांग की तिथि (जैसे आश्विन शुक्ल नवमी) नोट करें। अगले वर्ष उसी मास-पक्ष-तिथि को बरसी होगी। संशय हो तो हमारे पंडित जी से परामर्श करें — 📞 +91 92171 79989।
बरसी में कितने ब्राह्मण बुलाने चाहिए?
शास्त्रों के अनुसार कम से कम एक ब्राह्मण को भोजन कराना आवश्यक है। परिवार की सुविधा और क्षमता के अनुसार 5 से 11 ब्राह्मणों को भोजन कराना अधिक फलदायी माना जाता है। LRF का कम्प्लीट पैकेज (₹15,001) में 11 ब्राह्मण भोज की व्यवस्था शामिल है।
क्या बरसी Lodhi Road या Nigambodh Ghat पर हो सकती है?
हाँ, Lodhi Road और Nigambodh Ghat दोनों पर बरसी की व्यवस्था की जाती है। घाट पर तर्पण और पिंड दान का विशेष महत्व है। LRF के प्रीमियम पैकेज में घाट पर विधि की सुविधा शामिल है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *