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Vaishakh Amavasya 2026

Vaishakh Amavasya 2026: पितृ दोष शांति और पुण्य

by Ajeet Kumar | Posted on April 17, 2026October 12, 2026

Table of Contents

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  • वैशाख अमावस्या 2026: पितृ दोष शांति और पुण्य कमाने का खास दिन
    • तिथियों का शुभ मुहूर्त (Vaisakh Amavasya 2026 Dates)
      • पितृ दोष शांति के लिए क्यों है खास?
      • इस दिन क्या करें? (पुण्य कमाने के उपाय)
      • वैशाख अमावस्या का आध्यात्मिक महत्व
    • More From Last Ride Funeral

वैशाख अमावस्या 2026: पितृ दोष शांति और पुण्य कमाने का खास दिन

हिंदू पंचांग के अनुसार, वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि को वैशाख अमावस्या कहा जाता है। धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से इस दिन का विशेष महत्व है। साल 2026 में यह तिथि पितृ तर्पण, दान-पुण्य और कालसर्प दोष जैसी समस्याओं से मुक्ति के लिए अत्यंत फलदायी मानी जा रही है।

तिथियों का शुभ मुहूर्त (Vaisakh Amavasya 2026 Dates)

साल 2026 में वैशाख अमावस्या की तिथि को लेकर विशेष संयोग बन रहे हैं। मुख्य तिथियां इस प्रकार हैं:

  • अमावस्या तिथि प्रारंभ: 16 अप्रैल 2026, दोपहर से
  • अमावस्या तिथि समाप्त: 17 अप्रैल 2026, दोपहर तक
  • उदया तिथि के अनुसार: 17 अप्रैल 2026 को अमावस्या का व्रत और स्नान-दान किया जाएगा।

पितृ दोष शांति के लिए क्यों है खास?

शास्त्रों में वैशाख अमावस्या को पितरों की तृप्ति के लिए सर्वोत्तम माना गया है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में पितृ दोष है, जिसके कारण कार्यों में बाधा, संतान कष्ट या पारिवारिक कलह रहती है, तो इस दिन किए गए उपाय विशेष राहत देते हैं।

तर्पण और पिंडदान: इस दिन पवित्र नदियों (गंगा, यमुना, नर्मदा) में स्नान के बाद पितरों के नाम से जल में तिल मिलाकर तर्पण करना चाहिए।

अश्वत्थ (पीपल) पूजन: अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ में देवताओं और पितरों का वास माना जाता है। सुबह जल अर्पित करना और शाम को तिल के तेल का दीपक जलाना पितृ दोष के प्रभाव को कम करता है।

इस दिन क्या करें? (पुण्य कमाने के उपाय)

वैशाख मास में गर्मी का प्रभाव बढ़ने लगता है, इसलिए इस समय किए जाने वाले दान का स्वरूप भी सेवा प्रधान होता है:

  • जल सेवा: प्यासे को पानी पिलाना या सार्वजनिक स्थान पर प्याऊ लगवाना इस माह का सबसे बड़ा पुण्य है।
  • मिट्टी के पात्र का दान: ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को पानी से भरा मिट्टी का घड़ा (कलश) दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
  • अन्न और वस्त्र दान: पितरों के निमित्त काले तिल, सत्तू, छाता और जूते-चप्पल का दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
  • शनि देव की पूजा: चूंकि अमावस्या शनि देव का दिन भी मानी जाती है, इसलिए इस दिन शनि चालीसा का पाठ और सरसों के तेल का दान करना चाहिए।

वैशाख अमावस्या का आध्यात्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, त्रेता युग का प्रारंभ भी वैशाख मास से ही माना जाता है। इस दिन पवित्र सरोवर में स्नान करने से न केवल पापों का नाश होता है, बल्कि मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी होता है।


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